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कुलमी क्षत्रिय पाटीदारो का इतिहास | Kulami Kshatriya Patidaro Ka Itihas PDF Free Download

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कुलमी क्षत्रिय पाटीदारो का इतिहास | Kulami Kshatriya Patidaro Ka Itihas PDF Download


जबकि कड़वा सच बताने के लिए पर्याप्त भय-स्थान है, इस पुस्तक में चीनी-लेपित कुनैन की तरह सत्य अवश्य लिखा है जहाँ आवश्यकता है। ऐसे इतिहासकार का लेखन अंतिम और पूर्ण वास्तविकता नहीं है।

नतीजतन, भले ही उसके द्वारा संशोधित किए गए परिणामों को अस्वीकार कर दिया गया हो, उन्हें खुले दिल से स्वीकार किया जाना चाहिए, और एक दूसरे को स्वीकार करने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए।

खंडन और तथ्यों के खंडन के संघर्ष से ही समाज का पुनर्निर्माण किया जा सकता है। पाटीदार समाज के अतीत की नए दृष्टिकोण और कोणों से जांच करना।

जानकारी के लिए उन तथ्यों की जांच करना और समाज के सामने रखना वास्तव में महत्वपूर्ण है। आज के समय की तत्काल आवश्यकता उन विषयों पर वाद-विवाद और वार्तालाप प्रस्तुत करके आज की समस्याओं की कुंजी खोजना है।

फिर भी, ये सच्चाई हमारे युवाओं की निष्क्रियता और वड़ा नाम के लोगों के अहंकार की हीनता के कारण आम आदमी तक नहीं पहुंचती है।

नतीजतन, समाज की उन्नति बाधित होती है। गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान, विशेष रूप से, कई रीति-रिवाजों के राज्य हैं, और इन तीन प्रांतों में प्रगति हिमनद है।

कुछ बुद्धिजीवियों को आश्चर्य हो सकता है, "भारत में लोकतांत्रिक तरीके से पूरे समाज को पुनर्जीवित करने के प्रयास कहाँ हो रहे हैं, किसी भी जातीय इतिहास को महत्व देने की क्या आवश्यकता है?"

उन्हें समझना चाहिए कि पाटीदारों के बीच सामाजिक परिवर्तन के आंदोलन उन्मूलन की भावना से नहीं हुए हैं; बल्कि, जाति समाज में बदलाव लाने के लिए हुई है।

पुस्तक का एक मशीनी अंश


जब हमारे मन-मास्तिष्क में इतिहास शब्द आता है तो बरबस उस विषय की उत्पत्ति से लेकर आज-तक ना जाने कितने सवाल हमारे सामने खड़े हो जाते है। सर्वप्रथम इस धरती पर मानव ने जन्म लिया होगा, जैसे-जैसे समय आगे बढ़ा इंसानों ने अपनी सहुलियत के हिसाब से अपने आप को क्षत्रिय , वैश्य, शुद्र और ब्राह्मण आदि में बाँट लिया। 

फिर आगे चल कर नाना प्रकार कि जातियों और उपजातियों का जंजाल अपने वजूद व परिचय के चक्कर में खड़ा कर लिया। इस छोटे से इतिहास शब्द के लिए विषय विशेष के लिए अनादी से अनंत तक की यात्रा करनी होती है, खैर.. ऐसी मान्यता है कि कुर्मी क्षत्रिय पाटीदार समाज आर्य प्रजा के वंशज है। भारत में उनका मूल स्थान पंजाब था। 

इनका मुख्य व्यवसाय कृषि होकर आज भी मूलरूप में कृषि से जुड़े हुए है। मुख्य व्यवसाय कृषि होने के कारण कुर्मी क्षत्रिय पाटीदारों का लम्बे समय से स्थानांतरण होते आया है। पंजाब कि भूमि में बार-बार हो रहे आक्रमण व अस्थिरता के कारण वे पंजाब से निकलकर अन्यत्र राज्यों में चले गए। आज देश के विविध राज्यों में अलग-अलग नामों से जाने वाले कुर्मी एक होने के बावजूद एक-दुसरे से अपरिचित व दूर है।

गुजरात के पटेल वैदिक काल से धन-धान्य कि देवी कि उपासना करते आ रहे है। ऋगवेद में कृषि कि देवी " उषादेवी " कि उपासना कुल 182 ऋचाओंमें कि गई है। पटेल समाज लम्बे समय से धन-धान्य कि देवी कि उपासना करता आया है। यही उपासना आज माँ उमिया के नाम से कि जा रही है। माँ उमिया कि सवारी नंदी पर है, यही नंदी पाटीदारों की खेती में काम आया है। प्राचीन काल से ही पाटीदार समाज अपनी कुलदेवी माँ उमिया की उपासना पूरी आस्था और विश्वास से करते आया है और करता रहेगा। 

सम्पूर्ण भारत वर्ष एवं समग्र विश्व ये जानता है कि गुजरात के पटेलों (पाटीदारों) का आर्थिक, सामाजिक एवं शैक्षणिक विकास बेमिसाल हुआ है और उसी कि तर्ज पर निमाड़ का पाटीदार समाज प्रगतिशील है। ये सब कृपा कुलदेवी माँ उमिया की ही है जिसके बिना यह संभव नहीं था। हम थे तो एक ही लेकिन अब अनेक हो गए है। अब हम पटेल,चौधरी, पाटीदार, मातावाले, चौकवाले आदि हो गए है, या यूँ कहे कि हमने ही अपने ऊपर कई आवरण लपेट लिए है और शायद ये सब हमने अपने रुतबे और पहचान के लिए पदवियां लगाते गए जिससे हम खुद को गौरवान्वित महसूस करने लगे। आज पाटीदार समाज को अपनी पहचान बताने की आवश्यकता नहीं है।

पाटीदार समाज का नाम लेते है जेहन में किसान , मेहनती, ईमानदार , संस्कारवान , सेवाभावी जैसी विशेषताओं वाले समाज कि तस्वीर उभरने लगाती है। इन सभी विशेषताओ के कारण ही सन 1768 में होल्कर राज्य की महारानी माँ अहिल्या बाई होल्कर ने अपने राज्य को सुखी एवं सम्रद्धशाली बनांने के लिए उंझा के आस-पास से धरती पुत्र कहलाने वाले पटेल किसानो को बुलाया। निमाड़ कि धरती पर पुण्य सलीलामाँ नर्मदा के किनारे बसी महिष्मति महारानी देवी अहिल्या के राज्य कि राजधानी थी। 

सन 1768 में पटेल भाई उन्झां उत्तर गुजरात के आसपास से लगभग 400 बैलगाड़ी लेकर कुवांरबदी 30 के दिन प्रथम नागझिरी (करही) आये। दुसरे दिन से नवरात्रि प्रारम्भ हो रही थी एवं महिष्मति नगरी दूर थी इसलिए सभी ने मिलकर विचार कर गवली समाज के मुखिया श्री रुखडिया भाई पटेल के खलिहान में नव दुर्गा माताजी का खम्ब स्थापित कर साथ में लाये पाषाण कि मूर्ति की पूजा अर्चना की। बहुत धूमधाम से भाई-बहनों , बालकों एवं गाँव वालों के साथ गुजराती गरबे , देवियों कि कथाएं व माँ की महिमा गाई गई। बड़े हर्ष व उत्साह के साथ नवरात्री उत्सव संपन्न हुआ I यह उत्सव देखने आसपास के कई गाँव से लोग पधारे। 

गुजरात से आये पटेलों को महिष्मति कि महारानी ने पट्टे पर जमींन देकर खेती किसानी करवाई गई, जिसके फलस्वरूप राज्य में सम्रद्धि आई। गुजरात से आये पटेल परिवार पट्टे पर खेती करने के कारण पट्टेदार कहलाने लगे। समय के साथ-साथ शब्दों का अपना घिसाव होता है और उसी के चलते पट्टेदार, धीरे-धीरे पाटीदार कहलाने लगे। 4 फरवरी 2009 को क्षेत्र के समस्त पाटीदारो ने बड़ी धूम-धाम से ग्राम नागझिरी में मंदिर में श्री उमिया माताजी, श्रीअम्बिका माताजी व गुजरात से साथ लाई गई मूर्ति कि प्राण-प्रतिष्ठा की जिसमे उमिया माताजी सेवा ट्रस्ट उंझा से पधारे पदाधिकारियों ने भी भाग लेकर माँ का आशीर्वाद लिया। आज निमाड़ के पाटीदारों का कृषि क्षेत्र में कोई सानी नहीं है। आज समाज द्वारा उन्नत तरीकों एवं नवीनतम तकनीक से खेती-किसानी होनी लगी है। 

मिश्रित एवं अधिक फसल लेने से उत्पादन बढ़ा है। परम्परागत कपास, मक्का, गेंहू, चना,गन्ना, केला, सोयाबिन कि जगह नाना प्रकार कि फसलों जैसे फल, फुल, सव्जि एवं ओषधिय पोधों कि खेती का व्यवसायिक उत्पादन प्रारम्भ किया। आज समाजजन कृषि के साथ-साथ नौकरी, व्यापार-व्यवसाय एवं राजनीती जैसे क्षेत्रो में भी पैर जमा चुके है। आज सभी समाज जनों से अपील कि जाती है कि कुलदेवी माँ उमिया कि छत्रछाया में माला के मनके कि भांति एकजुट होकर , दुर्व्यसनों एवं कुरीतियों को छोडकर सहकार कि भावना के साथ संगठीत होकर सबके साथ आगे बढे। इस प्रकार की भावनाए होने पर निश्चित ही कुलदेवी माँ उमिया का आशीर्वाद हमारे साथ होगा।

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